Life-एक माँ की भी पहली शिक्षक ,उसकी अपनी माँ ही है ..जो उसे

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Mothers-Day
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एक बेटी जब माँ बनती है                                                                                                                      प्रिय माँ ,

आज मैंने एक खत लिखा है आपके नाम जो शायद आपको देना नही है, न ही उसका कोई मतलब है किसी की निगाह .. में पर इसे लिखने का एक मकसद है ..और वो ये है कि, आज माँ बनने के बाद मुझे एहसास हुआ है कि मैं आपके लिए क्या थी. आज महसूस हुआ कि रात भर क्यों जाग-जाग कर एक माँ बच्चे की परवाह करती है और एक बच्चे के आ जाने से जिंदगी कितनी बदल जाती है , आज मुझे एहसास हो रहा है कि मातृत्व क्या है.

माँ बनने से जुड़े तमाम एहसास , अपने भीतर एक नन्ही सी जान का वजूद , उसके जागने से लेकर सोने तक का पूरा वक़्त आप उसी में व्यस्त होते हैं. बच्चा पति पत्नी के बीच सेतु के समान होता है, शायद इसीलिए जब आप और पापा में अनबन होती थी आप खाने की थाली मुझसे ही भिजवाती थी, आज ठीक वैसे ही जब हम दोनों में बात-चीत बन्द होती है न तो आपका ये नाती हम दोनों की सुलह करवाता है, कभी बोलता है पापा,मम्मी की तबियत खराब है , आप प्यार से बोलो तो ठीक हो जाएगी और हम दोनों की सारी नाराजगी उसकी मासूम बातों में उड़नछू हो जाती है.

और फिर मुझे याद आ जाता है वो वक़्त जब आप और पापा को एक दूसरे से बात करवाने के लिए मैं जानबूझ कर चोट लगने का नाटक करती थी. लगता है इसकी छोटी छोटी हरकतों में मैं अपना बचपन जी रही हूं. लगता है मैं फिर से 5 वर्ष की छोटी सी जिद्दी बच्ची हूं और ये भी लगता है कि कभी खिलौनों और गुब्बारों की जिद करने पर आप मुझे कभी डांटती नही थी. जब पापा गुस्सा होते की ..”ये बहुत जिद्दी हो गयी है अब इसको कभी मेले में लेकर नही आऊंगा.” तब आप मुस्कुरा कर पापा को समझाती कि ..”बच्ची खिलौने और गुब्बारे नही मांगेगी तो क्या मैं, आप मांगेंगे ..” फिर पापा इस दुलार के आगे हार जाते.. और मैं खुश हो उठती.

आज जब मेरा पुत्र ऐसी जिद करता है तो मैं भी ऐसी ही सरल माँ बन जाती हूं ,हर तरह से सोचती हूं कि जाने दो बच्चे हैं ..बड़े होकर सब सीख जॉएँगे. सच ही तो है माँ कि ,मैं अब माँ शब्द का वास्तविक अर्थ समझ सकी हूं. आज जब आप मेरे साथ नही तो लगता है कि काश आप होती तो आपसे पूछती कि क्या आपको भी मेरे लिए ऐसा ही महसूस होता था. मैं जानना चाहती हूं कि मुझे विदा करने के बाद क्या आपको कभी सुकून भरी नींद आती थी , क्या सोचती थी आप ? कैसे महसूस करती थी आप ?

सोचती हूँ कि, जब मैं कॉलेज जाती थी तो आप मेरे घर लौट आने तक क्यों आशंकित रहती थी. मेरे एग्जाम देकर आने पर आप पेपर की सुध न लेकर ,सबसे पहले मुझसे कुछ खा लेने की जिद करती थी. ससुराल में आपकी उन प्यार भरी थपकियों को बहुत शिद्दत से महसूस किया है मैंने और सोचा करती थी कि , जब मुझे पहले बुखार आता था तो आप मुझे बिस्तर से उठने ही नही देती थीं. कितना कुछ है जो आपसे दूर होते ही मुझे महसूस होने लगा था किंतु सबसे ज्यादा एहसास माँ बनने के बाद हुआ.

आज सोचती हूँ तो खुद को बहुत भरा पूरा ,सम्पन्न सा पाती हूँ कि , ईश्वर का लाख लाख शुक्रिया अदा करती हूं कि उसने मुझे दुनिया के सबसे बड़े एहसास को जीने का मौका दिया. मातृत्व को इतनी खूबसूरती से जीने की सीख मुझे आपसे ही मिली . सन्तान को झिड़क कर नही सीने से लगाकर संस्कारो की माला में गूंथने का गुण ,और मिठास से ‘माँ’ शब्द को जीने की कला मैंने आपसे ही सीखी है. इस खत में मेरे दिल की तमाम वो बातें है, जो शायद हर बेटी अपनी माँ से कहना चाहेगी .

क्योंकि माँ बनने के बाद मातृत्व के हर अनुभव में एक लड़की को उसकी माँ अवश्य याद आती हैं . कभी मां की झिड़की ,कभी माँ की थपकी , कभी प्यार तो कभी लताड़ . हर वो अनुभव जो हमने अपनी माँ से सीखा है ..वो हम अपनी संतान के उचित पालन पोषण में कहीं न कहीं प्रयोग करते हैं . माँ के नुस्खे हों या नसीहतें जीवन पर्यंत हमारे काम आती है . इसीलिए माँ मैंने आज तुमसे अपनी सारी गिरहें खोल दी हैं जिनमे कहीं मेरे बचपन की पुनरावृत्ति है तो कहीं तुम्हारे नुस्खों की शिक्षा . जिनसे प्रेरणा लेकर मैं मातृत्व के हर अध्याय को बखूबी पूरा कर रही हूं .

सही कहा है कि, एक बच्चे की प्रथम शिक्षक उसकी माँ ही है . बल्कि मैं तो ये कहती हूं कि, एक माँ की भी पहली शिक्षक ,उसकी अपनी माँ ही है ..जो उसे मातृत्व के हर सोपान पर खरा उतरने में हर कदम पर मार्गदर्शन देती है।

Mother, Daughter, Love, Family, Relationship

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